चंडीगढ़, 18 दिसंबर | 22 जनवरी 2024 को पंजाब के निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर के नेतृत्व में निहंग सिंहों का एक समूह अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति स्थापना के अवसर पर भक्तों के लिए लंगर की व्यवस्था करेगा। यह घोषणा निहंग बाबा फकीर सिंह के आठवें वंशज जत्थेदार बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने की।
बाबरी मस्जिद पर सबसे पहले निहंगों का कब्जा था
श्री राम के प्रति निहंग सिंहों की भक्ति का जिक्र करते हुए बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने कहा कि बाबरी मस्जिद पर सबसे पहले निहंग सिंहों का कब्जा था। उन्होंने कहा कि नवंबर 1858 में निहंग बाबा फकीर सिंह के नेतृत्व में 25 निहंग सिंहों ने बाबरी मस्जिद पर कब्जा कर उसमें हवन किया था और दीवारों पर राम-राम लिखकर भगवा झंडा भी फहराया था।
इसके बाद, बाबरी मस्जिद के तत्कालीन मुअज़िम (मस्जिद अधिकारी) की शिकायत पर अवध के थानेदार ने 30 नवंबर, 1858 को उन 25 निहंग सिंहों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन्होंने कहा कि इस मामले में निहंग सिंहों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि निहंग सिख बाबरी मस्जिद में घुस गए थे और वहां राम के नाम पर हवन कर रहे थे। मामले में निहंग बाबा फकीर सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।
सिख धर्म सनातन हिंदू धर्म का एक अभिन्न अंग है
उन्होंने कहा कि सिख धर्म को हिंदू धर्म से अलग मानने वाले कट्टरपंथियों को पता होना चाहिए कि राम मंदिर के लिए पहली एफआईआर हिंदुओं के खिलाफ नहीं बल्कि सिखों के खिलाफ थी। उन्होंने कहा कि सिख सनातन हिंदू धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं और धर्म की रक्षा करने वाले योद्धा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं हैं। वे केवल सनातन परम्पराओं के वाहक हैं। वह कई बार अयोध्या आ चुके हैं। उन्होंने अब 22 जनवरी को मूर्ति स्थापना के मौके पर अयोध्या में लंगर लगाने का फैसला किया है।





