चंडीगड। बठिंडा से संसद मैंबर हरसिमरत कौर बादल ने आज मांग की है कि एक साल पहले किसान अंदोलन खतम होने के वकत किसानों से किये गए वादों के मुताबिक एमएसपी कमेटी का तुरंत पुनरगठन किया जाए ओर एमएसपी को किसानों का कानूनी अधिकार बनाया जाए।
संसद में यह मसला उठातो हुए हरसिमरत ने कहा कि केंदर सरकार ने लिखत भरोसा दिया था कि वह एमएसपी तय करने वाली कमेटी में किसान प्रतिनिधी शामल करके इसका पुनरगठन करेगी, पर उसने ऐसा किया नहीं।
हरसिमरत कौर बादल ने जोर देकर कहा कि किसानों से लिखित वादा करना और उसे पूरा नहीं करना सरकार को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों से किया वादा पूरा नहीं कर किसानों को फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर कर रही है.
उन्होंने बिजली संशोधन विधेयक का जिक्र किया जिसकी केंद्र सरकार ने किसानों की चिंताओं के अनुसार समीक्षा करने का आश्वासन दिया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सांसद हरसिमरत कौर बादल ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए 850 किसानों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग भी उठाई और किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की भी मांग की।
उन्होंने यह भी बताया कि कैसे सरकार ने 2019 में गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर सभी बंदी सिंहों को रिहा करने का फैसला किया था और साथ ही भाई बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की भी घोषणा की ताकि उन्हें रिहा किया जा सके। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों के नाम सहित विस्तृत आदेश के बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि इससे सिख समुदाय में गलत संदेश जा रहा है और हम मांग करते हैं कि सभी बंदी सिंहों को तुरंत रिहा किया जाए।





