Sunday, April 19, 2026
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72% महिलाएं मैरिड लाइफ से असंतुष्ट, इससे बढ़ रहीं शादी में परेशानियां

पति के नपुंसक होने और पत्नी के रिलेशन न बनाने की शिकायतों के चलते शादी तोड़ने के मामले बढ़ रहे हैं। सेक्शुअल कंपैटिबिलिटी न होने पर इस बारे में पति-पत्नी एक-दूसरे से बात नहीं करते, एक-दूसरे की जरूरतों की परवाह नहीं करते, जिससे समस्या बढ़ती है और बात तलाक तक पहुंच जाती है।

साइंस डायरेक्ट पर मौजूद एक रिसर्च के मुताबिक शारीरिक संबंधों में असंतुष्टि रिश्तों में दरार की बड़ी वजह बनती है। रिसर्च बताती है कि संबंध बनाने की चाहत पूरी न होने की शिकायत करने वालों की शादीशुदा जिंदगी में दिक्कतें ज्यादा होती हैं। वहीं, जिनकी फिजिकल रिलेशन की जरूरतें जितनी ज्यादा पूरी होती हैं, उनकी मैरिड लाइफ उतनी ही बेहतर होती है और समस्याएं भी कम होती हैं।

पार्टनर से लिबिडो लेवल मैच न होने से फैमिली में बिखराव

एक ऑनलाइन सर्वे में 72 फीसदी महिलाओं ने अपनी शादीशुदा जिंदगी में ‘सेक्स लाइफ’ से असंतुष्टि की बात मानी। 12 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनके पति से कभी उनके संबंध नहीं बने। वहीं, 8 फीसदी महिलाओं ने उनकी मर्जी के खिलाफ संबंध बनाने के लिए मजबूर किए जाने की बात बताई। सर्वे में सामने आया कि 23.6 फीसदी पुरुषों और 17.6 फीसदी महिलाओं ने अपने पार्टनर के साथ चीटिंग की।

जर्नल SAGE की एक रिसर्च के मुताबिक 39 फीसदी पुरुष और 27 फीसदी महिलाओं ने माना कि अगर उनका और उनके पार्टनर का लिबिडो लेवल मैच न हुआ, तो वे ऐसी रिलेशनशिप में नहीं रहना चाहेंगे।

पार्टनर न बनाए संबंध तो मांग सकते हैं तलाक

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि बिना किसी खास वजह के लंबे समय तक शारीरिक संबंध न बनाना पार्टनर के साथ मानसिक क्रूरता है और इसके आधार पर तलाक मांगा जा सकता है। नपुंसकता के आधार पर भी तलाक की मांग की जा सकती है।

रिसर्चगेट पर मौजूद एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में तलाक के 16 फीसदी मामलों में पति या पत्नी के किसी और से संबंध बनाने और 14 फीसदी मामलों में साथी के प्रति क्रूरता बरतने को आधार बनाया गया था। रिसर्च में तलाक के 6 फीसदी मामलों की वजह नपुंसकता पाई गई।

देश में डिवोर्स रेट में बढ़ोतरी हो रही है और इसकी कई वजहों में शारीरिक संबंधों की चाहतें पूरी न हो पाना भी शामिल है…

हाई लिबिडो वाली महिलाएं ‘सेक्शुअल शेमिंग’ की शिकार

डॉ. कोठारी बताते हैं कि महिलाओं और पुरुष दोनों का लिबिडो हाई हो सकता है। कुछ कपल में मेल पार्टनर की सेक्शुअल ड्राइव ज्यादा होती है, तो कुछ में फीमेल पार्टनर में। यह जरूरी नहीं है कि पुरुषों का लिबिडो लेवल ही हाई हो। लेकिन, रिपोर्ट्स ये कहती हैं कि महिला को सेक्शुअल चाहतों के लिए न सिर्फ जज किया जाता है, बल्कि उसके चरित्र पर सवाल उठने लगते हैं।

जिसकी वजह से उसे शर्मिंदगी, डिप्रेशन और एंजाइटी से जूझना पड़ता है, अपनी इच्छाओं को दबाना पड़ता है। जबकि, 2016 में प्रकाशित ‘जर्नल ऑफ सेक्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन महिलाओं का लिबिडो लेवल हाई रहता है, वे फिजिकल रिलेशन में ज्यादा संतुष्टि महसूस करती हैं और उनकी ‘एक्टिव सेक्स लाइफ’ भी बेहतर होती है।

जानें आखिर क्या है लिबिडो

साइकोएनालिसिस की बुनियाद रखने वाले सिगमंड फ्रायड ने करीब 100 साल पहले बताया कि हर इंसान में जन्म से ही 2 इन्स्टिंक्ट (instinct यानी मूल प्रवृत्ति) होती हैं- लाइफ इन्स्टिंक्ट और डेथ इन्स्टिंक्ट। लाइफ इन्स्टिंक्ट में सेक्शुअल ड्राइव्स यानी संबंध बनाने की चाहत होती हैं, जिसकी एनर्जी को उन्होंने नाम दिया ‘लिबिडो’। यही एनर्जी जीवन का आधार है। इसी से संसार रचता और बसता है।

इसी लिबिडो को वेदों में ‘काम’ कहा गया है, जो 4 पुरुषार्थों में से एक है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। संन्यासी आदि शंकराचार्य को भी मंडन मिश्र और उनकी पत्नी भारती से शास्त्रार्थ जीतने के लिए इसी ‘काम’ का ज्ञान लेना पड़ा था।

दरअसल, लिबिडो ही व्यक्ति की ओवरऑल सेक्शुअल ड्राइव है। इसमें प्रेम है, रोमांस है, हॉर्मोंस का केमिकल लोचा है और फिजिकल फिटनेस के संग मेंटल हेल्थ भी। इन सबके असर के चलते ही किसी का लिबिडो लेवल हाई रहता है, तो किसी का लो।

लेकिन, हाई लिबिडो वाले लोगों को सेक्शुअल शेमिंग से लेकर शर्मिंदगी, डिप्रेशन, अपराध बोध जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिसका असर उनकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को बर्बाद कर देता है। रिश्तों में दरार आ जाती है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि मैरिड लाइफ पर इंटिमेट रिलेशन का पॉजिटिव असर पड़ता है…

हर व्यक्ति का ‘नॉर्मल लिबिडो लेवल’ अलग होता है

एक्सपर्ट बताते हैं कि ‘सेक्स ड्राइव’ बहुत ही निजी मामला है, जो हर किसी का अलग-अलग होता है। किसी के लिए ‘लो ड्राइव’ भी नॉर्मल होती है और किसी के लिए ‘हाई ड्राइव’ भी।

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी के मुताबिक किसी में नशा और मानसिक बीमारियां लिबिडो लेवल बढ़ा सकती हैं, लेकिन बहुत से लोगों में जन्म के समय से ही लिबिडो लेवल हाई रहता है। सेक्शुअल प्रॉब्लम्स से जूझ रहे कपल्स को थेरेपी देने वाले डॉ. अनिर्बन बिस्वास कहते हैं कि कुछ लोगों में डोपामाइन और सेरोटोनिन का बैलेंस गड़बड़ होता है। जिससे उनका लिबिडो लेवल बढ़ने लगता है।

डोपामाइन और सेरोटोनिन न्यूरोट्रांसमीटर और हॉर्मोंस हैं। डोपामाइन जहां सेक्शुअल ड्राइव बढ़ाता है, वहीं सेरोटोनिन इस पर कंट्रोल रखता है।

कुछ लोगों में फिजियोलॉजिकली लिबिडो लेवल ज्यादा होता ही है, लेकिन इसकी वजह भी साफ नहीं है। यह स्त्री और पुरुष दोनों में हो सकता है। अमूमन टेस्टोस्टेरॉन का स्तर 20 साल की उम्र में सबसे ज्यादा होता है। जिससे सेक्शुअल ड्राइव बढ़ जाती है।

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