चंडीगढ़, 26 नवंबर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में लापरवाही के मामले में फिरोज़पुर के तत्कालीन एस.पी गुरविंदर सिंह समेत 7 अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में 2 डी.एस.पी, 3 इंस्पेक्टर और 1 ए.एस.आई शामिल हैं। गौरतलब है कि 5 फरवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली में शामिल होने के लिए बठिंडा से सड़क मार्ग से फिरोजपुर के हुसैनीवाला जा रहे थे। रास्ते में किसानों ने ट्रैक्टर रोककर हाईवे जाम कर दिया।
पी.एम का काफिला 20 मिनट तक फ्लाईओवर पर रुका रहा। जब रास्ता नहीं खुला तो उन्हें वापस जाना पड़ा। बठिंडा एयरपोर्ट पर पहुंचकर पीएम ने कहा था- आपके मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना, कहना कि मैं जिंदा लौट रहा हूं। तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री थे।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी और डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को दोषी ठहराया गया है। कमेटी ने यह रिपोर्ट 8 महीने पहले अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट और सरकार को सौंपी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र ने सितंबर 2022 में पंजाब सरकार को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। बता दें कि इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने पूरी घटना की जांच की।
प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान तत्कालीन एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) नरेश अरोड़ा, एडीजीपी (साइबर क्राइम) जी नागेश्वर राव, डीआइजी फरीदकोट सुरजीत सिंह (अब सेवानिवृत्त), एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह, आइजी (काउंटर इंटेलिजेंस) राकेश अग्रवाल, डीआइजी फिरोजपुर रेंज इंदरबीर सिंह और एसएसपी फिरोजपुर हरमनदीप हंस ड्यूटी पर थे। पहले इस पूरी घटना के लिए एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी कमेटी की रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य सचिव और डीजीपी की लापरवाही सामने आई है।
गृह विभाग ने निलंबित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है। यदि उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाता है तो उन्हें उसी पद पर पदावनत किया जा सकता है जिस पद पर उन्होंने नौकरी शुरू की थी। गृह एवं न्याय विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र का प्रारूप और गवाहों की सूची तैयार कर सरकार को भेजी जाये। पीपीएस अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। वे उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बिना स्टेशन नहीं छोड़ सकेंगे। इन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। एसपी गुरविंदर सिंह, डीएसपी प्रसून सिंह, जगदीश कुमार, इंस्पेक्टर जितिंदर सिंह, बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह और एएसआई राकेश कुमार।
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