Bharat Jodo Yatra: राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) के आज 100 दिन पूरे हो गए। राहुल गांधी ने इस यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर 2022 से कन्याकुमारी से की थी, बीते 100 दिनों में यह यात्रा आठ राज्यों से गुजर चुकी है। तमिलनाडु के बाद केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश होते हुए इस समय भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में है। 24 दिसंबर को यह यात्रा राजधानी दिल्ली में दाखिल होगी।
राहुल गांधी की इस यात्रा से कांग्रेस को बहुत उम्मीदें है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस यात्रा से पार्टी मजबूत हुई है। जिसका फायदा पार्टी को हिमाचल के विधानसभा चुनाव में मिला। लेकिन विरोधी गुजरात की करारी हार को याद दिलाते हुए इस यात्रा से कांग्रेस के मजबूत होने के दावे को गलत करार दे रहे हैं। आईए पक्ष-विपक्ष के दावों से इतर यह जानते हैं कि कांग्रेस को भारत जोड़ो यात्रा से क्या मिला?
राहुल गांधी की खुद की छवि बदली
इस 100 दिन की भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी की खुद की छवि बदली। यह इस यात्रा का एक बार हासिल है। पहले जो लोग राहुल गांधी को पप्पू बोलकर उनका मजाक उड़ाते थे, अब वो भी राहुल और उनकी इस यात्रा की दबी जुबान में तारीफ कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान राहुल ने खुद को राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने का काम किया।
कांग्रेस कैडर में उत्साह का संचार
राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कुल 12 राज्यों से गुजरेंगे। इस यात्रा के दौरान राहुल जहां-जहां से गुजर रहे हैं, जहां-जहां ठहर रहे हैं, वहां कांग्रेस को फिर से जिंदा कर रहे हैं। बीते कुछ साल में मोदी के नेतृत्व में भाजपा के अच्छे दिन से कांग्रेस लगातार पिछड़ रही थी। लेकिन अब राहुल गांधी ने इस यात्रा के जरिए अपने कैडर में उत्साह का संचार किया है।
महंगाई, बेरोजगारी और नफरत के माहौल पर चोट
कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत में ही इसका मकसद महंगाई, बेरोजगारी, देश में बढ़ रही नफरत के खिलाफ आवाज उठाना बताया था। ये वो मुद्दे हैं, जिनसे देश के अधिसंख्य लोगों का वास्ता है। लेकिन राष्ट्रीय फलक पर इन मुद्दों पर वैसी चर्चा नहीं होती, जैसी होनी चाहिए। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लगातार इस मुद्दे पर चोट करते दिखे। जिससे ये तीनों मुद्दे अब चर्चा में है।
कांग्रेस को सभी वर्गों का मिला साथ
जैसे-जैसे भारत जोड़ो यात्रा का कारवां बढ़ता जा रहा है, इसमें लेखक, अभिनेता, इकोनॉमिस्ट, एक्टिवस्ट, सोशल साइंटिस्ट, किसान, मजदूर, खिलाड़ी जैसे सभी वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं। इन दिग्गजों के जुड़ने से एक मैसेज यह निकल रहा है कि देश का एक बड़ा तबका अब राहुल का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार है। हालांकि इसका लाभ चुनावी जीत के साथ ही साबित होगा।





