पंजाब पुलिस ने औपचारिक रूप से ‘गैंगस्टरों पर वार’ मुहिम की शुरुआत कर दी है, जो सूबे में संगठित अपराध के खिलाफ एक निर्णायक और बड़े पैमाने पर जंग का आगाज है। यह मुहिम पंजाब से गैंगस्टरवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए पंजाब सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान की सफलता के बाद अब पंजाब पुलिस ने अपना ध्यान संगठित अपराध की ओर मोड़ा है। नशा विरोधी मुहिम के तहत कई बड़े-छोटे तस्करों को गिरफ्तार किया गया, भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए और सप्लाई चेन तथा स्ट्रीट लेवल नेटवर्क को काफी हद तक तोड़ दिया गया है। सीमावर्ती सूबा होने के कारण पंजाब को सीमा पार से नशे धकेलने की लगातार कोशिशों का सामना करना पड़ता है, जिसका सरकार ने एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाकर करारा जवाब दिया है। ‘गैंगस्टरों पर वार’ मुहिम गहरी योजनाबंदी और मूल्यांकन के बाद युद्धस्तर पर शुरू की गई है और यह देश में गैंगस्टरवाद के खिलाफ सबसे बड़ी और गंभीर कार्रवाइयों में से एक है। “गैंगस्टर” शब्द पंजाब की शब्दावली में सिर्फ 15-18 साल पहले ही आया था और इससे पहले छोटे अपराधियों को महज ‘बदमाश’ कहा जाता था। अमृतसर में गिरफ्तारी की कोशिश के दौरान पुलिस पर गोलीबारी करने वाले गैंगस्टर मनी प्रिंस को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया और यह ऑपरेशन कई घंटे चला। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के हवाले से अगर कोई गैंगस्टर गोलियां चलाएगा, तो उसे गोलियों से ही जवाब दिया जाएगा। दोषियों के डोजियर तैयार करके सांझा किए गए हैं। पंजाब पुलिस कानून के दायरे में रहकर अपराधियों का पीछा करेगी। पंजाबियों से पुलिस का सहयोग करने की अपील की। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। गैंगस्टरों के खिलाफ सही जानकारी देने वालों को उचित इनाम दिया जाएगा। गैंगस्टरवाद और नशा पिछली सरकारों द्वारा बोए गए जहरीले पौधे हैं और पंजाब सरकार पंजाब को इन कांटों से मुक्त करने के लिए वचनबद्ध है।




