Saturday, April 18, 2026
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करीब 5 लाख बुजुर्गों की पेंशन और 10 लाख परिवारों का राशन कार्ड काट चुकी है सरकारः Bhupinder Hooda

चंडीगढ़ः परिवार पहचान पत्र बुजुर्गों की पेंशन और गरीबों का राशन कार्ड काटने का हथियार है। बिना किसी जानकारी व जांच पड़ताल के सरकार धड़ल्ले से लोगों की पेंशन व राशन बंद कर रही है। ये कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। हुड्डा ने कहा है कि परिवार पहचान पत्र में लोगों की अनाप-शनाप आय दिखाकर अब तक करीब 5 लाख बुजुर्गों की पेंशन और करीब 10 लाख गरीब परिवारों के राशन कार्ड काटे जा चुके हैं। बुजुर्ग और गरीब परिवार अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कोई समाधान नजर नहीं आ रहा।

हुड्डा ने कहा कि परिवार पहचान पत्र में इस हद तक गड़बड़झाला है कि 10 साल से दिल्ली पुलिस में सरकारी नौकरी करने वाले शख्स को तो बीपीएल सूची में डाल दिया गया और गरीब विधवाओं का नाम इस सूची से उड़ा दिया गया। ऐसे गरीब परिवारों की फैमिली आईडी में लाखों रुपये की आय दिखा दी गई, जो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के सहारे गुजर-बसर कर रहे हैं। इस तरह के कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं कि रेहड़ी-फड़ी लगाने व चाय बेचने वालों की आय भी सरकारी कर्मचारियों से ज्यादा दिखा दी गई। बिना किसी तरह की जांच पड़ताल और जानकारी के आंखें बंद करके सरकार ने फैमिली आईडी में लोगों की आय का कॉलम भर दिया। सरकार के पास इसे वेरीफाई करने का कोई भी मानक तरीका नहीं है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पीपीपी की आड़ में सिर्फ पेंशन और राशन ही नहीं बल्कि गरीबों को तमाम सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। गरीब परिवार आयुष्मान से भी वंचित हो रहे हैं। कांग्रेस द्वारा विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस ने तथ्यों के साथ सरकार को बताया कि किस तरह परिवार पहचान पत्र और प्रॉपर्टी आईडी में बड़े स्तर पर गड़बड़झाले हो रहे हैं। सरकार की गलती का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लेकिन सरकार सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनने का ड्रामा करती रही। सरकार की ऐसी ही कारगुजारियों और गड़बड़झालों की वजह से प्रदेश का हर वर्ग इससे परेशान है।

हुड्डा ने दोहराया कि भविष्य में कांग्रेस सरकार बनने पर जनता को पीपीपी और प्रॉपर्टी आईडी जैसे जंजाल से मुक्ति दिलाई जाएगी। प्रत्येक योग्य बुजुर्ग को स्वघोषित आय के आधार पर पेंशन और गरीब परिवारों को पीले राशन कार्ड दिए जाएंगे। इसी तर्ज पर किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ से मुक्ति दी जाएगी। क्योंकि प्रत्येक किसान को उसकी फसल का एमएसपी देना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए किसी पोर्टल की जरूरत नहीं है।

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