पंजाब के युवाओं को दिनोंदिन नशा अपने आगोश में जकड़ता जा रहा है। युवा एक किक की तलाश में अपने जीवन के साथ ही अपने परिवार के भविष्य को भी अंधेरे कुएं में धकेल रहे हैं। चिंता की बात यह है कि परिणाम की जानकारी होने के बावजूद युवा खुद को नशे की गिरफ्त में जाने से रोक नहीं पा रहे हैं।
प्रदेश में नशे के फैलते मकड़जाल पर काबू के लिए पंजाब सरकार पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर बनाए गए रोडमैप पर काम भी कर रहा है, लेकिन परिणाम अब भी संतोषजनक नहीं है। विभाग के प्रोफेसर जेएस ठाकुर और उनकी टीम द्वारा मनोचिकित्सा विभाग के साथ मिलकर किए गए सर्वे के आधार पर पंजाब के जिलों में नशे की मौजूदा स्थिति का आकलन किया गया है। इसमें साफ पता चल रहा है कि मानसा और श्री मुक्तसर साहिब के युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
सात में से एक युवा नशे की चपेट में
पीजीआई के विशेषज्ञ द्वारा किए गए सर्वे में इस बात का खुलासा किया गया है कि पंजाब के हर सात में से एक युवा नशे की चपेट में है। नशा लेने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है और शहरों के साथ ही गांव में इसका दंश तेजी से पैर पसार रहा है। नतीजतन पीजीआई के नशा उन्मूलन केंद्र में इलाज कराने आने वाले मरीजों में लगभग 45 प्रतिशत संख्या पंजाब के मरीजों की है।
22 जिलों की स्थिति गंभीर
सर्वे रिपोर्ट में जिलेवार नशे के स्तर की जानकारी के किए गए खुलासे में पंजाब के 22 जिलों की स्थिति खराब है। सबसे ज्यादा नशा मानसा और श्री मुक्तसर साहिब में युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। इन दोनों शहरों में नशे का स्तर 35 प्रतिशत से ऊपर है जबकि सर्वे में शामिल 10 से ज्यादा छोटे जिले ऐसे हैं जहां उसका स्तर 7 प्रतिशत से ज्यादा है। चिंता की बात यह है कि सभी जिलों में नियमित रूप से नशा लेने वालों की संख्या से मौजूदा समय में नशा लेने वाले युवकों की संख्या ज्यादा है यानी दिनोंदिन नए युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं।
आंकड़े बयां कर रहे हकीकत
जिला नशा का स्तर
मनसा 39.1 प्रतिशत
श्री मुक्तसर साहिब 37.1 प्रतिशत
होशियारपुर 28 प्रतिशत
बरनाला, मोंगा 25 प्रतिशत
एसबीएस नगर 24.3 प्रतिशत
जिला अदालत में प्रतिदिन औसतन आ रहे 30 एनडीपीएस के केस
चंडीगढ़ जिला अदालत में प्रतिदिन औसतन 30 केस एनडीपीएस एक्ट के आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा युवाओं की संख्या होती है। इनकी उम्र 18 से 24 साल के बीच है। पिछले 20 दिनों में पकड़े गए नशा तस्करों की उम्र भी 25 वर्ष से कम ही है। ज्यादा युवा मात्र आठवीं तक पढ़े हैं और रेहड़ी लगाने का काम करते थे। इसके अलावा नशा करने वाला व्यक्ति चोरी, डकैती जैसे संगीन अपराधों को अंजाम दे चुके हैं। एक नशा तस्कर ने बताया था कि स्कूल और कॉलेज उनके आसान टारगेट होते हैं।
दक्षिण के सेक्टरों में सबसे ज्यादा फैला है नशे का जाल
चंडीगढ़ में दक्षिण के सेक्टरों में नशे का जाल सबसे ज्यादा फैला है। बाहर से आकर नशा तस्कर किराए से कमरा भी भी दक्षिण के सेक्टर व कॉलोनियों में लेते हैं। हाल ही में पकड़े गए आरोपी ने पुलिस को इसकी जानकारी दी थी। चंडीगढ़ पुलिस ने 30 साल में तीन टन नशीला पदार्थ पकड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा गांजे की है। जिन केसों में सुनवाई पूरी हो चुकी है उस नशे को पुलिस ने नष्ट करवा दिया है। ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी (डीडीसी) के चेयरमैन और यूटी पुलिस के एसएसपी मुख्यालय मनोज मीणा के नेतृत्व में 1341 केसों में छह बार नशे को नष्ट किया गया है। 42 एनडीपीएस एक्ट के केसों में बरामद किया गया ड्रग्स अभी मालखाने में रखा है। वर्ष 2021 के 5 और 2022 के 37 केसों में सीएफएसएल रिपोर्ट आनी बाकी है।
पंजाब में नशे से स्थिति गंभीर होती जा रही है। युवाओं को नशे की चपेट में आने से रोकने के लिए रोड मैप तैयार किया जा चुका है। उसमें स्थिति की गंभीरता बताने के साथ ही बचाव के उपायों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है, लेकिन सबसे जरूरी यह है कि युवा एक किक (नशा) को लेकर अपनी सोच बदलें। महज एक दिखावा या चंद मिनटों के सुकून की बात को तवज्जो देकर वह अपना और अपने परिवार का जीवन बर्बाद ना करें। -प्रो जेएस ठाकुर, समुदायिक चिकित्सा विभाग पीजीआई





