Saturday, April 18, 2026
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एशिया प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय का सहनिर्माण करें

19 नवम्बर को एपेक के नेताओं का 29वां अनौपचारिक सम्मेलन थाईलैंड में संपन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शीचिनफिंगने एशिया प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय का सहनिर्माण करने, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए सिलसिलेवार अहम पहल पेश की। सम्मेलन में पारित दस्तावेजों ने चीन के संबंधित सुझाव को प्रतिबिंबित किया। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का व्यापक तौर पर मानना है कि शीचिनफिंग के बयान ने वैश्विक प्रशासन का एशियाका समय दिखाया। चीन सभी पक्षों को एकजुट कर एक साथ चुनौतियों का सामना करने वाली नेतृत्वकारी शक्ति बन चुका है।

एपेकएशिया प्रशांत क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग प्लेटफार्म है। हाल में विश्व आर्थिक विकास मंदी में रहा। कुछ देशों ने शीत युद्ध के विचार को लेकर इंडो-पसिफिक रणनीति अपनायी, जिससे एशिया- प्रशांत सहयोग को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इस बार के एपेक सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शीचिनफिंग ने नयी परिस्थिति में एशिया-प्रशांत सहयोग को आगे बढ़ाने के छह सुझाव पेश किये और शांति और स्थिरता, समान समृद्धि वाले स्वच्छ और सुन्दर एशिया प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना करने की अपील की। उन्होंने सच्चे बहुपक्षवाद और बहुवक्षीय व्यापारिक तंत्र की रक्षा करने पर जोर दिया। चीनएशिया-प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना करने के उद्देश्य से सहयोग प्रस्ताव बना रहा है।एपेक सम्मेलन के दौरान चीन और इंडोनेशिया ने व्यापक सामरिक साझेदारी संबंधों की पंचवर्षीय योजना पर हस्ताक्षर किये। दोनों नेताओं ने एक साथ जर्काता-बांडुंग रेल लाइन के प्रायोगिकसंचालन को देखा। उधर, चीन और थाईलैंड ने और स्थिर, समृद्ध और सततचीन-थाईलैंड साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना करने का ऐलान किया और चीन-थाईलैंडरेलवे निर्माण में तेजी लाने पर सहमति जताई।

विश्लेषकों का मानना है कि चीन-इंडोनेशिया साझे भाग्य वाले समुदाय और चीन-थाईलैंड साझे भाग्य वाले समुदाय कासहनिर्माण द्विपक्षीय संबंधों के उच्च स्तर को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही एशिया-प्रशांत साझे भाग्य वाले समुदाय और मानव साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना करने के लिए मिसाल भी कायम करेगा। चीन का विकास एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अलग नहीं हो सकता, जबकि एशिया-प्रशांत की समृद्धि भी चीन से अलग नहीं रह सकती। आधुनिकीकरण की ओर बढ़ने वाला चीन अवश्य ही खुद के नये विकास से एशिया-प्रशांत और दुनिया को और ज्यादा नये मौके प्रदान कर पाएगा।

(साभार—चाइना मीडियाग्रुप, पेइचिंग)

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